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Wednesday, May 1, 2013

यही पुरुष बाप है,भाई है,बेटा है,पति है ,जिन्हें हमने जन्म दिया है,गलती हमारी है बेटियों का भ्रूण मारने की वजाय बेटों का भ्रूण ख़त्म करना चाहिए \ कहीं ऐसा न हो की समाज में इनके द्वारा बढ़ते अपराध और कुकृत्य से इस वर्ग से ही नफ़रत हो जाये \बेटियाँ दुष्कर्म नहीं करतीं किसी का बलात्कार नहीं करतीं ,जिन्हें हम अपना जिस्म निचोड़कर,बेटियों को दरकिनार कर खड़ा करते हैं सिर्फ वंश के नाम पर वही इस जननी को बहन बेटी को शर्मसार करते हैं उन पर जुल्म करते हैं ।कृपया सज्जन व्यक्ति इस टिप्पड़ी से आहत ना हों ,स्त्रीधन पर अनाचार,अत्याचार अस्मत पर जो कुठाराघात आजकल देखने सुनने को मिल रहा है उन तल्खियों ने मजबूर किया लिखने को । जिनका दायित्व बनता है हम सबकी रक्षा करना वो भूखे भेड़िये अपनी मां ,बहन बेटी के भक्षक बन जाते है ,मात्र क्षणिक सुख के लिए । टी .वी .चैनल पर समाचार पत्र में प्रतिदिन ऐसे घृणित कृत्य का वाकया देखने पढ़ने को मिलता है। समाज का बेहद ही गिरा हुआ एक तबका है जो इतनी घटिया मानसिकता रखता है। ऐसे लोगों को जनता द्वारा चौराहे पर खड़ा कर कूट-कूट कर नमक डालकर सजा देना चाहिए ताकि विकृत से विकृत व्यक्ति भी ऐसा करने की हिम्मत ना कर पाए।जिन आँखों में नन्ही  कलियों के लिए वासना उफनती है उन आँखों को चील,कौओं की तरह नोंच लेना चाहिए \
                                                                                                                          शैल सिंह      

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