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Thursday, May 23, 2013

किसी ने वीरां हवेली दिले गुलजार कर दी ।

         
तुम्हीं मेरे नग़मा तुम्हीं मेरे आँसू
तुम्हें भूल जाऊं ये मुमकिन नहीं
गम दिया तूने तोहफा गवारा मुझे
अर्थी गम की सजाऊं ये मुमकिन नहीं ।

दोस्ती से कहीं बेवफाई का गम
हंसते-हँसते हुए भी हुई आँख नम
क्या बताऊं कि क्यों बिक गयी दोस्ती
रब से शिकवा बहुत बदनसीबी से कम ।

कब हुए दूर तुम कि याद का नाम दूँ
कब थी तनहा कि एहसास का नाम दूँ
सांसों में तुम सिसकती मौजों में तुम
दर्द दिल के हो तुम इसका क्या नाम दूँ ।

रुवाब लेकर गए जिस्म से रूह तुम
वजूद खुद से जुदा हो गया ऐ खुदा
देखि सूरत नलाकाश जब आईने में
आइना भी ताज्जुब हो गया ऐ ख़ुदा ।

बेचैन ख्यालों में देंगे दस्तक कभी
जब वफाओं के मेरी मंजर जाने जां
अश्कों के कतरे भिगोयेंगे दामन तेरा
गिर वफाओं के मेरी खन्जर जानेजां ।

ऐसी मीठी-मीठी लहर उठेगी दर्द की
नम आँखें जरुर होंगी तेरी सितमगर
कुछ तो ढूंढेगी नजरों की बेताबियाँ
मगर तस्वीर मगरूर होगी ऐ बेखबर ।


सहेज रखा है दिल में सामां समय के
घटा बरसी नयन से रस्मों-रिवाज पे
साथ तुमने था छोड़ा दोराहे पर लाकर
कसमों वादों का अब मैं क्या नाम दूं ।

जिस मंजिल पर छोड़ा था तनहा कभी
गमे दास्तां हंगामें हजारों हैं दामन मेरे
सदमा लगेगा देखकर आज भी ऐ हुजूर
दर्द में कितने निसार हैं साथ कारवां मेरे।

हसरतों की दुनियां उजाड़ी किसी ने मेरी 
किसी ने जिंदगी ऐसी सदके बहार कर दी
तुझपे दुनियां निसार का अंजाम ये मिला
किसी ने वीरां हवेली दिले गुलजार कर दी ।  


                                        शैल सिंह


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