*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Tuesday, May 21, 2013

मन सनातन

   

विषय भोगों से सना तन 
 मन सनातन 
मांस मज्जा से बना तन ,
 मन सनातन 
ज्ञान गीता भागवत का सुना करते 
और सपने स्वर्ग के हम बुना  करते 
मंदिरों में चढ़ाया करते   चढ़ावा 
कर्मकांडों को बहुत देते बढ़ावा 
तीर्थाटन ,धर्मस्थल ,देवदर्शन 
मगर माया मोह में उलझा रहे मन 
सोच है  लेकिन पुरातन 
मन सनातन 
कामनाये  ,काम की, हर दम मचलती
लालसाएं कभी भी है  नहीं घटती 
और जब कमजोरियों का बोध आता 
कभी हँसते ,या स्वयं पर क्रोध  आता 
इस तरह संसार के   बंध  गए बंधन
समस्यायें आ रही है नित्य  नूतन 
तोड़ बंधन ,करें चिंतन 
मन सनातन

मदन मोहन बाहेती'घोटू'  
 

No comments: