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Friday, May 10, 2013

माँ


अतुलनीय है प्यार ,
तुम्हारे नेह बंध का सार ,
मुझ में साहस भर देता है ,
नहीं मानती हार ,
माँ तुझे मेरा शत-शत प्रणाम |
आज जहाँ मै खड़ी हुई हूँ ,
जैसी हूँ ,
तुमसे ही हूँ मैं ,
मुझे यही हुआ अहसास ,
माँ तुझे मेरा प्रणाम |
तुमने मुझ में कूट- कूट कर 
भरा आत्म विश्वास 
जो है मेरे पास
माँ मेरा तुझे शत-शत प्रणाम |
न कोई वस्तु मुझे लुभाती ,
कभी किसी से ना भय खाती ,
रहती सदा ससम्मान ,
माँ मेरा तुझे हर क्षण प्रणाम !
आशा

9 comments:

s said...

माँ तो माँ होती है ....बहुत सुन्दर रचना

कालीपद "प्रसाद" said...


माँ का ऋण कोई उतार नहीं सकता =बहुत सुन्दर

latest post'वनफूल'
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अज़ीज़ जौनपुरी said...

umda

ब्लॉग बुलेटिन said...

ब्लॉग बुलेटिन के माँ दिवस विशेषांक माँ संवेदना है - वन्दे-मातरम् - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

Anonymous said...

माँ को श्रद्धेय नमन।

सादर

हरकीरत ' हीर' said...

बहुत सुन्दर...!!

Anita Lalit (अनिता ललित ) said...

माँ तुझे प्रणाम!
सुंदर अभिव्यक्ति!
~सादर!!!

Asha Lata Saxena said...

माँ को शत शत नमन |आप लोगों को टिप्पणी हेतु धन्यवाद |

Sadhana Vaid said...

माँ तो फिर माँ होती है ! माँ जैसा और कोई कहाँ ! बहुत सुंदर रचना !