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Saturday, April 6, 2013

अहसास

अहसास

अहसासों की दुनिया
लगती सब से भिन्न
है जीवन का  हिस्सा अभिन्न
मन में भरती   रंग
जब भी मनोभाव टकराते
जोर का शोर होता
अधिकाधिक कम्पन होता
अस्तित्व समूचा  हिलता
मन में तिक्तता भरता
तब कलरव नहीं भाता
कर्ण कटु लगता
विचार छिन्न भिन्न होते
एकाग्रता को डस लेते
यदा कदा  जब भी
कोइ अहसास होता
बीता पल याद दिलाता
 वे यादें जगाता
जब थे सब नए
नया घर वर नए लोग
बर्ताव भी अलग सा
था निभाना सब से
था कठिन परिक्षा सा
वह समय भी बीत गया
कोमल भावों से भरा घट
जाने कब का रीत गया
कठिन डगर पर चल कर
जितने भी अनुभव हुए
एक ही बात समझ में आई
है यथार्थ  ही सत्य
यही पल मेरा अपना
यहीं मुझे जीना है
निस्पृह हो कर रहना है |

आशा 

3 comments:

कालीपद "प्रसाद" said...

कोमल भावों से भरा घट
जाने कब का रीत गया
कठिन डगर पर चल कर
जितने भी अनुभव हुए
एक ही बात समझ में आई
है यथार्थ ही सत्य
यही पल मेरा अपना
यहीं मुझे जीना है
निस्पृह हो कर रहना है -बहुत भावपूर्ण खुबसूरत रचना
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देवदत्त प्रसून said...

'दिल' को जब 'अहसास' गुदगुदाते हैं |
सहज ही कविता के छन्द उभर आते हैं !!

Asha Lata Saxena said...

टिप्पणी हेतु आप लोगों को धन्यवाद |
आशा