*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Friday, April 12, 2013

गज़ल

बंद रखा है दिल का झरोखा 

ये पागल पवन  ना उड़ा ले 

कहीं यादों का अनमोल तोहफा 

ये पागल ......। 

जमजमा लगती जिंदगी सनम 

एहसास की मीठी-मीठी चुभन 

हमसफर साथ हैं परछाईयाँ 

महकाती जीवन की तन्हाईयाँ 

जाग काटी हैं रातें नयन में

भोर सा नींद में ना चुरा ले

कोई सपनों का झिलमिल भरोसा 

ये पागल ........। 

भींचकर ख्वाब की बांह में 

बेश-कीमती साज मन छांह में  

ख़त सीने से तेरा लगा रखा है  

बीते लम्हों की चीजें छुपा रखा है 

ये मनमौजी काली घटायें 

उमड़कर बरस ना बहा लें 

बेशुमार जलवों का निशां अनोखा 

ये पागल ...........। 

जमजमा---संगीतमय,मनोरंजक 


                                             शैल सिंह