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Saturday, March 9, 2013

स्थानम प्रधानम न बलं प्रधानम

     घोटू के दोहे
स्थानम प्रधानम न बलं प्रधानम
           1
धन और पोजीशन करे,देखो कैसे काम
कल तक 'परस्या'कहाता ,'परशराम 'अब नाम 
                      स्थानम प्रधानम न बलं प्रधानम
            2
काजल जो लागे कहीं,तो कालिख कहलाय
गौरी  की आँखों  अंजे,दूनो रूप   बढ़ाय
                       स्थानम प्रधानम न बलं प्रधानम
              3
बीस तीस की माखनी ,दाल मिले जो आम
पहुँची होटल मौर्या ,हुए  आठ सौ   दाम
                       स्थानम प्रधानम न बलं प्रधानम
                  4
गौरी की गोदी  रहे ,श्वान लिपट इतराय
देख गली के कूतरे ,भौंक भौंक चिल्लाय
                        स्थानम प्रधानम न बलं प्रधानम
                    5
गूदे संग जब तक बंधा ,कहलाता है आम 
गूदा खा फेंका गया ,अब गुठली है नाम
                         स्थानम प्रधानम न बलं प्रधानम
                   6
रोड़ा पत्थर राह का,हर कोई देय  हटाय
मंदिर में सिन्दूर लग,निशदिन पूजा जाय
                         स्थानम प्रधानम न बलं प्रधानम
                  7
गति बदले हर चीज की,जगह बदल जब जाय
पहुँच प्लेट से पेट में ,क्या से क्या बन जाय़

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'  

1 comment:

दिनेश पारीक said...

बहुत खूब सुन्दर लाजबाब अभिव्यक्ति।
महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ ! सादर
आज की मेरी नई रचना आपके विचारो के इंतजार में
अर्ज सुनिये
कृपया मेरे ब्लॉग का भी अनुसरण करे