*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Saturday, March 2, 2013

मै और मेरी मुनिया

        मै और मेरी मुनिया

तुम कहते हो बड़े गर्व से ,
                         मै  अच्छा और मेरी मुनिया
कोई की परवाह नहीं है ,
                         कैसे,क्या कर लेगी दुनिया 
पैसा नहीं सभी कुछ जग में ,
                       ना आटा ,या मिर्ची ,धनिया
सबका अपना अपना जीवन,
                       राजा ,रंक ,पुजारी,बनिया  
कोई भीड़ में  नहीं सुनेगा,
                       रहो बजाते,तुम  टुनटुनिया 
उतने दिन अंधियारा रहता ,
                        जितने दिन रहती चांदनियां
तन रुई फोहे सा बिखरे ,
                        धुनकी जब धुनकेगा  धुनिया  
ये मुनिया भी साथ न देगी,
                         जिस दिन तुम छोड़ोगे दुनिया

मदन मोहन बहेती'घोटू'