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Thursday, January 17, 2013

ऐ !जिस्म तेरी हकदार तो बस


गमें जिंदगी से लाजवाब
           आखिर जहन्नुम की देहरियां होंगी
दरीचों तक पहुँचाने को ताबूत के,
          कफन की बेहतरीन चुनरियां होंगी
उठेगा जनाजा बड़ी धूमधाम से
         चार कन्धों की मजबूत सवारियां होंगी
ऐ !जिस्म तेरी हकदार तो बस
         चिताओं की बेमिसाल चिमनियाँ होंगी ।

2 comments:

s said...

दर्द भरी प्रस्तुति ...सुन्दर रचना

Unknown said...

Wow! Wah! Wah!
No comparison!
Brijesh
htt://voice-brijesh.blogspot.com