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Saturday, December 29, 2012


दामिनी तुम तो खुद दामिनी थीं आतताईयों
पर कहर बरपा दी होती अंग झुलसा दी होती \
हिमाकत में आग लगा दी होती ,जो मन्त्र फूंक
तुम सो गयी हमेशा के लिए उसकी मशाल
जल रही है और जलती रहेगी तू अमर हो गयी
दामिनी ,हर किसी को झकझोर दिया है तेरे साथ
हुए अमानवीय ,अमानुषिक अत्याचार ने \आज का
दिन कैसा इतिहास लिखेगा ,ये तो आगे .........


कर इतनी बुलंद आवाज की व्यभिचार रुक जाये
सहनशक्ति मौन तोड़ दे चंडी का अवतार बन जाये \
दिखा इतना कहर आक्रोश का कि आगाज हो जाये
क्या हस्ती हमारी है सारे संसार को अंदाज हो जाये \


2 comments:

Mamta Bajpai said...

सच ...दुःख के भीषण पल हैरान से हम सब
अब तो उठानी ही होगी मशाल ..

Shail Singh said...

dhanyabad mamata ji