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Saturday, December 29, 2012

दामिनी के लिए दो शब्द




जिन्दगी को जीना अब उसे बोझ लगने लगा होगा \ 
मरहम ही  अब उसे  चोट लगने लगा होगा ।
सोचा होगा उसने ,यहाँ बहुत राजनीती है मेरे जिन्दा रहने  में 
जिन्दगी से ही उसका भरोषा उठने लगा होगा  
छोड़ दिया होगा उसने  जिन्दगी की राह में चलना उसने  
उसको खुद का  जिन्दा रहने से ज्यादा खामोश रहना ही सही लगा होगा ,,,

रचनाकार -प्रदीप तिवारी

3 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति..!
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (30-12-2012) के चर्चा मंच-1102 (बिटिया देश को जगाकर सो गई) पर भी की गई है!
सूचनार्थ!

महेन्द्र श्रीवास्तव said...

बेटी दामिनी की श्रद्धांजलि


हम तुम्हें मरने न देगें
जब तलक जिंदा कलम है

pradeep tiwari said...

dhanyawad ....