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Saturday, November 3, 2012

'अकेलापन'

सुना लागे घरवा मोरा झनके अंगनवां  

दूर देशे पढ़े गईले सुगनी औ सुगनवां 

तनिको ना लागे मनवां छछने परनवां 

दुनो रे झुन्झुनवां बिना,छछने परनवा,दुनो रे ......

            माई के अंचरवा नियर कहाँ मिली छाँह  हो 

            बाबा के दुलरवा नियर कहाँ मिली बांह हो 

            करकेले छतिया मोरी कईसे होईहें दुनों थतिया मोरी 

            के दिहें पानी दनवाँ,दुनो रे झुन्झुनवां बिना छछने परनवां  

बबुवा लिखी भेजें पतिया बबुनी करे टेलीफोनवां 

धीर धरा एक दिन माई चहकी तोर भवनवां 

हमनी के संवारे खातिर काहें अँखिया देखे आखिर 

झिलमिल सपनवां,दुनो रे झुन्झुनवां बिना छछने परनावां,

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