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Wednesday, November 14, 2012

'उनकी रुसवाईयां'

पता तो चले वो ख़फा किसलिए हैं

 हमें देखकर हैं ऐसे नजर फेर लेते  

पता तो चले ये अदा किसलिए है \


जिस गली से गुजरते हैं हम सैर को 

उस गली से हैं वो झट मुँह मोड़ लेते 

हर महफ़िल जो होती हैं मुझसे जवां 

भरी महफ़िल बेरुखी से वो छोड़ देते

पता तो चले ये अलविदा किसलिए है \


बेवफाई ना झगड़ा ना ही शिकवे गिले

वार करते बड़ी ही सादगी से वे मुझपे  

होती सूरत से बस उनकी रुसवा बयां

कुछ खबर ही नहीं क्या है मेरी खता 

पता तो चले वो गमजदा किसलिए हैं \  

                                              'शैल सिंह'

 

4 comments:

Unknown said...

बहुत ही सुंदर रचना | दिवाली की शुभकामनायें |

ஜ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●ஜ
ब्लॉग जगत में नया "दीप"
ஜ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●ஜ

shailrachanablogspotin said...

dhanyad sahani ji

shalini rastogi said...

क्या बात है शैल सिंह जी,,, बहुत खूब!

Madan Mohan Saxena said...

बहुत सराहनीय प्रस्तुति.बहुत सुंदर बात कही है इन पंक्तियों में. दिल को छू गयी. आभार !
बेह्तरीन अभिव्यक्ति .बहुत अद्भुत अहसास.
दीपावली की हार्दिक शुभकामनाये आपको और आपके समस्त पारिवारिक जनो को !

मंगलमय हो आपको दीपो का त्यौहार
जीवन में आती रहे पल पल नयी बहार
ईश्वर से हम कर रहे हर पल यही पुकार
लक्ष्मी की कृपा रहे भरा रहे घर द्वार..