*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Monday, November 5, 2012

'शबनमीं मोती'


अश्कों का जाम पीते उम्र तन्हा गुजार दी 

एहसान आपने जो ग़म मुफ्त में उधार दी। 

       वफाओं के कतरे भीगोयेंगे कभी दामन तेरा

       जब चुपके से तोड़ेंगे ज़ब्त ख्यालों का घेरा। 

लाखों इनायत करम आरजूवों प्यार में 

लम्हा-लम्हा काटा सफर है बेकरार में।

         बहुत अख्तियार था बेजुबाँ दर्द पे साथियों 

         हूँ उदास टूटे नग़मों की झंकार पे साथियों। 

दिल जलाकर मुस्कराती बेशरम चाँदनी 

मखमली आँचल भींगोती बेमरम शबनमीं। 

5 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

वाह...!
बहुत उम्दा!

Unknown said...

आपकी उम्दा पोस्ट बुधवार (07-11-12) को चर्चा मंच पर | जरूर पधारें |
सूचनार्थ |

shalini rastogi said...

बहुत खूब साहिल जी!

shailrachanablogspotin said...



aapko sabako mera dhanyavad

shailrachanablogspotin said...



aapko sabako mera dhanyavad