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Wednesday, November 21, 2012

''मुंबई हादसा ,26.11.2008 ''

यह कविता मैंने मुंबई हादसे के दौरान लिखी थी ,उस समय दिल में कैसी हलचल और रोओं में कैसी सिहरन उत्पन्न हुई थी ,वह इस कविता में व्यक्त करके थोड़ी राहत मिली थी \


संयम को समझो कमजोरी नहीं
     मनमानी को समझो दिलेरी नहीं,
अल्टीमेटम है हमने दे ही दिया
    हर सीमा तोड़ेंगे बात कोरी नहीं \

आपस के सभी मतभेद मिटाकर
      सर्वसम्मति के दस्तावेज बनाकर,
अब ठोस तरीके से हम कुचलेंगे
      आतंकवाद के विरुद्ध जंग जगाकर \

प्रतिष्ठा पर असह्य आघात लगा है
       जन आक्रोश का लहर जगा है,
गुनाहगारों का क्रूर कहर बरपाना
      भारतीयों ने अगणित बार सहा है \ 

देख लिया,बहुत हो गयी शांतिवार्ता
      सह लिये अनगिनत बार आघात,
कुटनीतिक हौसलों से भारत को भी
      दुश्मनों को अब देनी होगी मात \

आतंक के विरुद्ध हम एकजुट हैं
      छोड़ परम्परागत ढंग चाल तरीके,
बदले का विगुल बजा दिया लो
     जंग की नोंक तेज धारदार बना के \

झकझोर गया दिल मुंबई हादसा
        समूचे राष्ट्र की दहल उठी आत्मा,
चीत्कार उठी सबकी द्यनीभूत वेदना
        बस अब नहीं सहेंगे इतनी यातना \ 

जाने कितनी बार छाला दरिंदों ने
      संयम को हर बार चुनौती दी है,
छब्बीस नवम्बर की क्रूर वारदात ने
      आँखें हिंदुस्तान की नम कर दी हैं \

निर्दोषों के जान की कीमत अब
      छलने वालों दरिंदों चुकानी होगी,
टुच्चों कितनी है औकात हमारी
      बेईमानों उसी भाँति बतानी होगी \

करकरे,काम्टे,कृष्णन,सालस्कर
     की कुर्बानी हम व्यर्थ न जाने देंगे,
दहाड़ रहा लहू का कतरा-कतरा
     हर जान की कीमत वसूल कर लेंगे \

वेवजह जानें हुई हैं लहुलूहान जो
     वो भारत का अनमोल खजाना हैं,
उसी बर्बरता के जवाब में पापियों
    बर्बरता के अंजाम तक जाना है \ 

कितनी माँगे,ललाट सुनी सुहाग की
      कितनी ममताओं की गोंद उजाड़ी,
कितनी बहनों की,राखी छीनी कलाई
     कितनी देश की अथाह सम्पदा बिगाड़ी \

गोधरा से लेकर अक्षरधाम तक
     जयपुर,दिल्ली,जम्मू,कश्मीर कभी,
फैजाबाद,बनारस,हैदराबाद काण्ड
     के,दिल पर जख्मों के नासूर अभी \

दहशत फ़ैलाने वालों आतंकियों सुनो
     क्यों माँ की कोंख कलंकित करता बे,
वो कितनी तादाद में पैदा करती जो
     मानव बम बन ईक-ईक कर मरता बे \

भारत की अस्मिता लिए जरुरत आज़
      प्रबुद्धजनों की बेहद सह भागीदारी,
आओ मिल जुलकर हम सब हाथ मिलाएं
      नेतृत्व की करें स्वयं जोश भरी तैयारी \

प्रबुद्ध,गुणी होनहार,राष्ट्र भक्तों की
      देश में कोई कमीं नहीं,फिर क्यों,
मूक,बधिरों को चुन लेता मतदाता
     यह बात सभी को पता नहीं क्यों \ 

मातृभूमि की संप्रभुता के लिए
     एक स्वर संसद में जैसा है गूंजा,
एकता,अखंडता की ऐसी मिसाल
     भला क्या कहीं और मिलेगी दूजा \ 

                                                           'शैल सिंह''





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