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Tuesday, May 29, 2012

सगुन: मन में नेह के तार बहुत बा

भोजपुरी ग़ज़ल 

मन में नेह के तार बहुत बा.
ई नदिया में धार बहुत बा.

तनिको चूक के मौका नइखे 
 गरदन पर तलवार बहुत बा.

सौ एके छप्पन के आगे 
पर्चो भर अखबार बहुत बा.

काहे गांव से भगत बा ड 
गांव में कारोबार बहुत बा.

के अब केकर दुःख बांटे ला  
बनल रहे व्यवहार बहुत बा.

मिल जाये त कम मत बुझिह 
चुटकी भर संसार बहुत बा.

---देवेंद्र गौतम 

(समकालीन भोजपुरी साहित्य में प्रकाशित)


सगुन: मन में नेह के बहुत बा:

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