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Sunday, April 29, 2012

ग़ज़लगंगा.dg: मेरी बर्बादियों का गम न करना

मेरी बर्बादियों का गम न करना.
तुम अपनी आंख हरगिज़ नम न करना.

हमेशा एक हो फितरत तुम्हारी
कभी शोला कभी शबनम न करना.

कई तूफ़ान रस्ते में मिलेंगे
तुम अपने हौसले मद्धम न करना.

जो आया है उसे जाना ही होगा
किसी की मौत का मातम न करना.

ये मेला है फकत दो चार दिन का
यहां रिश्ता कोई कायम न करना.

हरेक जर्रे में एक सूरज है गौतम
किसी का कद कभी भी कम न करना.

----देवेंद्र गौतम

ग़ज़लगंगा.dg: मेरी बर्बादियों का गम न करना:

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