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Friday, April 13, 2012

तुमने जो सहला दिया है

तुमने जो सहला दिया है

तुमने जो सहला दिया है

मन मेरा बहला दिया है
जरा से ही इशारे में,
बहुत कुछ कहला  दिया है
तुम्हारी प्यारी  छुवन ने
लगा दी है आग तन में
एक नशा सा छागया है
और मन पगला गया है
जब तुम्हारी सांस महके
जब तुम्हारे  होंठ दहके
तुम्हारी  कातिल  अदायें
तरंगें मन में  जगायें
कामनाएं  बलवती है
सांस की दूनी गति है
घुमड़ कर घन छा गए है
ह्रदय को तडफा गए   है
तुम्हे अब क्या बताएं हम
बड़ा ही बेचैन है    मन
अगर बारिश आएगी ना
प्यास ये बुझ पायेगी  ना
तुम्हारी इन शोखियों ने,
ह्रदय  को दहला दिया है
तुमने जो सहला  दिया है
मन मेरा बहला दिया है

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

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