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Friday, March 16, 2012

ग़ज़लगंगा.dg

एक कत्ता

अपने पाओं पे खड़ा होने दो.
घर का बच्चा है, बड़ा होने दो.
प्यास दुनिया की ये बुझाएगा
कच्ची मिटटी है घड़ा होने दो.

------देवेंद्र गौतम

ग़ज़लगंगा.dg

2 comments:

Dr Varsha Singh said...

बहुत सुंदर भाव अभिव्यक्ति.....

Kahaf Rahmaani said...
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