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Tuesday, February 21, 2012

मोहब्बत भी अज़ीब हैं


मोहब्बत भी अज़ीब हैं....
उसकी मुस्कान से हो जाती हैं
और उसकी आंखो मे खो जाती हैं

मोहब्बत भी अज़ीब हैं....
दिल की सुन लेती हैं
ख्वाब बुन लेती हैं

मोहब्बत भी अज़ीब हैं....
लफ्जो का सहारा लेती हैं.
और लबो को बंद कर देती हैं.

मोहब्बत भी अज़ीब हैं....

(चिराग)

3 comments:

Rajesh Kumari said...

bahut umda likha hai.

Anonymous said...

@rajesh kumari ji
thanks

sushma 'आहुति' said...

सुन्दर भावो को रचना में सजाया है आपने.....