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Wednesday, February 15, 2012

खुशियों के क्षण

खुशियों के क्षण
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नौ महीने तक रखा संग में ,पिया,खाया
जिसकी लातें खा खा कर के,मन मुस्काया
माँ जीवन में,खुशियों का पल ,सबसे अच्छा
रोता पहली बार,जनम लेकर जब  बच्चा
एक बार ही आता है  ये पल जीवन में
जब बच्चा रोता और माँ खुश होती मन में

मदन मोहन बहेती'घोटू'

3 comments:

Shanti Garg said...

बहुत बेहतरीन....
मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है।

dinesh aggarwal said...

सार्थक एवं सटीक बात कहती हुई बेहतरीन रचना।
कृपया इसे भी पढ़े-
नेता- कुत्ता और वेश्या(भाग-2)

कविता रावत said...

badiya sarthak prastuti..