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Saturday, February 4, 2012

जीवन .............



जीवन ............. 

जीवन में सुख दुःख  
उतार-चढ़ाव आते ही रहते है
हर सुख के बाद दुःख
अपने बारी के इंतज़ार में रहता है.
न सुख टिकता है ....
और न दुःख ही.
इसलिए हर दो सुखों के बीच-
 दुःख है !
लेकिन दुखों के बीच जो है-
वही जीवन है !
ठहराव है !!
इंसान बस सुख की कामना करता है
और भागता रहता है
आनंद और सुख के लिए..
छटपटाता रहता है उन्हें पाने के लिए
लेकिन दुःख आने पर भी
जो विचलित न हो....
और सुख में भी अपने "मैं"  को अलग रखे
आछेप और बंधनों के होने पर भी
स्थिर रहे,ठहरा  रहे
साक्षी भाव से सब अपने साथ
घटता हुआ देखे,अनुभव करे
सम व्यवहार,सम विचार,और सम भाव रहे
वही मुक्त है !!!!!

7 comments:

ana said...

bahut sundar bhaw liye hue kavita...sundar

NISHA MAHARANA said...

लेकिन दुःख आने पर भी
जो विचलित न हो....बहुत बढिया।

Maheshwari kaneri said...

बहुत बढिया।..

vidya said...

बहुत मुश्किल है मगर, सच्चे अर्थों में मुक्त होना..
सार्थक रचना..

Roshi said...

bahut gehre bhav..........

ख़बरनामा said...

बेहतरीन भाव पूर्ण सार्थक रचना.....
खबरनामा की ओर से आभार

sushma 'आहुति' said...

बेहतरीन अभिव्यक्ति.....