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Tuesday, January 31, 2012

अनकहे दिल की सौगात - आकाश कुमार




मैंने जो कुछ भी लिखा पुरे दिल की गहराइयों से उसके लिए संजय भास्कर जी को धन्यवाद देना चाहता हूँ जो समय समय पे मेरा गुरु बनकर मार्ग प्रसस्त करते आ रहे हैं |
प्रिय संजय भास्कर जी आपकी बातों में आकर मैंने  अपनी जज्बातों को लिख दिया | अब आगे देखते है -----
प्यारे ब्लोग्वासी अगर आपको पसंद आये तो धन्यवाद नहीं आये तो भी धन्यवाद | - ऐसा मेरे गुरु (संजय भास्कर जी ) ने सिखाया |
मेरे गुरु (संजय भास्कर जी )


न जाने कौन सी बात  पे वो हो गई खफा |
क्यों बन गया मैं उनके नज़रों में बेवफा ||
अक्सर मैं रोता हूँ याद करके उनकी बातों को |
कैसे मिटा दूं अपने दिल से दी हुई उनकी सौगातों को ||

                   चुप्पी हुई क़दमों से आना धीरे से मेरी कानों में फुसफुसाना |
                   अकेले में देखकर मुस्कुराना सहेलियों के बिच शर्मना ||
                    आज भी भुला नहीं पाता हूँ उन अकेली मुलाकातों को |
                    कैसे मिटा दूं अपने दिल से दी हुई उनकी सौगातों को ||

समय बदला, युग बदला, बदल गया जमाना |
इस प्यार को भुलाने का क्या क्या करूँ बहाना ||
दिन कट जाती है पर सो नहीं पाता रातों को |
कैसे मिटा दूं अपने दिल से दी हुई उनकी सौगातों को ||

                  छुपा कर रखता था उनकी तस्वीर किताबों में |
                  दिल की बात दिल में रखकर खोया उनकी यादों में ||
                  जब मैं मिलता उनसे चूमता प्यारी हाथों को |
                  कैसे मिटा दूं अपने दिल से दी हुई उनकी सौगातों को ||

तू सावन की रानी मैं भादो का राजकुमार |
प्यार का गाथा कोई न जाने इसकी लीला अपरम्पार ||
तू सावन में जन्मी मैं कृष्ण पक्छ (अस्ठ्मी) की रातों को |
कैसे मिटा दूं अपने दिल से दी हुई उनकी सौगातों को ||



4 comments:

Swati Vallabha Raj said...

bahut hi sahjta se kah gaye dil ki baato ko...achhi rachna..

सूत्रधार said...

आपके उत्‍कृष्‍ठ लेखन का आभार ।

meenakshi said...

Achhi rachna hai...

Meenakshi Srivastava

***Punam*** said...

sanjayji ko badhaayi...
apki rachna ke liye aapko bhi badhaayi..