*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Thursday, January 26, 2012

हम सौभाग्यशाली हैं

हम सौभाग्यशाली हैं
पाई हमने आजादी की हवा मुफ्त में
पाया हमने गणतंत्र मुफ्त में
हम सौभाग्यशाली मुफ्तख़ोर हैं।
इसीलिए आज
पाया है हमने गनतंत्र मुफ्त में।
वे जिन्होंने चुकाए थे दाम
आज उनसे हमारा क्या काम?
वे आँसू क्यों बहाते हैं?
वे क्या नहीं देखते?
हम कितने बिजी हैं
अरे दो दिन तो
उनके नाम पर फूल चढ़ाते हैं।
क्या सारा समय हम
उनके ही सपनोें को देखते रहें!
हमारी भी आँखें हैं
हम देश को अपने हिसाब से चलाएंगंे
अपने हिसाब से आगे बढ़ाएंगें
हम सौभाग्यशाली मुफ्तख़ोर हैं।
विकसित देश अपने आप ही पाएंगें
दुनिया वाले देखते ही रह जाएंगें।
हम सौभाग्यशाली हैं



सभी भारतवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। 

4 comments:

sushma 'आहुति' said...

गणतन्त्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ ....................

काजल कुमार Kajal Kumar said...

:)

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर!
63वें गणतन्त्रदिवस की शुभकामनाएँ!

dinesh aggarwal said...

मित्र कैसे कह रहे कि भाग्यशाली हैं
है कहाँ गणतंत्र कि हम भाग्यशाली हैं
कुर्बानियाँ दी हैं हमारे पूर्वजों ने जब
मुफ्त में कैसे मिली कि भाग्यशाली हैं
हम हुये आजाद हमने पाल रक्खा भ्रम
नाम के आजाद कैसे भाग्यशाली हैं
क्या यही गणतंत्र है कविता पढ़े मेरी
फिर कहें यह वाक्य कि हम भाग्यशाली हैं
क्या यही गणतंत्र है
नेता,कुत्ता और वेश्या