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Monday, January 23, 2012

मेरा दर्द....,


आप सभी मित्रों के लिए पेश है नए साल(2012) का मेरा पहला पोस्ट
जिसमें तो दो अलग-अलग लाइने हैं पर दोनों कविता का अर्थ और दर्द एक ही है,


(१)
मुझे उदास देख कर उसने कहा ;
मेरे होते हुए तुम्हें कोई 
दुःख नहीं दे सकता,


"फिर ऐसा ही हुआ"
ज़िन्दगी में जितने भी दुःख मिले, 
सब उसी ने दिए.....
(२)
वो अक्सर हमसे एक वादा करते हैं कि;
"आपको तो हम अपना बना कर 
ही छोड़ेंगे"
और फिर एक दिन उन्होंने अपना
वादा पूरा कर दिया,


"हमें अपना बनाकर छोड़ दिया..."


नीलकमल वैष्णव"अनिश"

6 comments:

Ravi Chauhan said...

Really very niceeeeee

Ghotoo said...

sundar rachna

Roshi said...

lazabbab...........

Surinder Singh said...

Nice...

Swati Vallabha Raj said...

adbhut....bahut khub..

NEELKAMAL VAISHNAW said...

बहुत-बहुत धन्यवाद आप सभी का
@रवि जी
@घोटू जी
@रोशी जी
@सुरिंदर जी
@स्वाति वल्लभ राज जी