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Friday, December 30, 2011

कर्म

अपनों को सौप कर आबरू
                       मैंने गुनाह कर दिया...
छीन ली जब दलालों ने कुर्सी
                     फिर क्यू  मै मौन रह गया...
लूटते रहे वो माँ  की आबरू
                      खंजरो से उसने तार तार कर दिया...
मै निकला ऐसा कपूत जो
                       देखकर  भी अनदेखा  कर गया......
  अब जो न उठाई आवाज
                           क्या हमें इतिहास माफ़ करेगा
अब भी न उठाई आवाज तो
                            फिर कौन इन्साफ करेगा.......
देश के सम्मान का मजाक मत बनने दो  
                          आत्म सम्मान के खातिर कुछ  तो करो .....
आज नहीं तो कल मरना ही होगा
                           आज मरे तो कल अपना बेहतर होगा......
जन्मभूमी पुकार रही है
                                अब देश की ललकार यही है.........
 भ्रस्टाचार मुक्त हो हो भारत
                                  जन जन की आवाज यही है .............


                rachanakaar --pradeep tiwari
                www.pradeeptiwari.mca@gmail.com





   

1 comment:

मनीष सिंह निराला said...

सार्थक एवं चिंतनीय रचना जो उर्जावान है !