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Thursday, December 22, 2011

मुंबई देखी है



 
जन्म से मरणासन्न
गीली लकड़ियों सी सुलगती
सम्पन्नता की इत्री महक में छटपटाती
उनकी खुशी देखी है
मैंने मुंबई देखी है,
बदबूदार नालों के आगोश में सैकड़ों 
दो फूटी झोपड़ियां, 
कीड़ों से बिलबिलाते बचपन, 
चंद सिक्कों के बोझ से  
हिचकोले खाती जवानियाँ
गर्म गोस्त से सजी दूकाने 
गर्म रक्त के बाजुओं में  
चाकुओं, गोलियों और बमों  पर 
टिकी रोटियां ,
घ्रणित  रोगों से सनी 
सूखी हड्डियां देखी है
मैंने मुंबई देखी है,
ऊची ऊची  अट्टालिकाओं के आगोश में 
केचुए से रेंगते हज़ारों 
देशी  मगर 
तथाकथित  विदेशी लोग, 
जगमग  लाइट की चकाचौंध से सराबोर  
आपने बस फिल्म देखी है 
मैंने मुंबई देखी है .

-कुश्वंश

6 comments:

अरूण साथी said...

एक यथार्थ,

वन्दना said...

सच कहा।

अनुपमा त्रिपाठी... said...

कल 24/12/2011को आपकी कोई पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

सत्याभिव्यक्ति...

सादर.

Point said...

मैंने मुंबई देखी है .....बहुत खूब

BLOGPRAHARI said...

आपका ब्लॉग पढ़कर अच्छा लगा. अंतरजाल पर हिंदी समृधि के लिए किया जा रहा आपका प्रयास सराहनीय है. कृपया अपने ब्लॉग को “ब्लॉगप्रहरी:एग्रीगेटर व हिंदी सोशल नेटवर्क” से जोड़ कर अधिक से अधिक पाठकों तक पहुचाएं. ब्लॉगप्रहरी भारत का सबसे आधुनिक और सम्पूर्ण ब्लॉग मंच है. ब्लॉगप्रहरी ब्लॉग डायरेक्टरी, माइक्रो ब्लॉग, सोशल नेटवर्क, ब्लॉग रैंकिंग, एग्रीगेटर और ब्लॉग से आमदनी की सुविधाओं के साथ एक सम्पूर्ण मंच प्रदान करता है.
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