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Friday, December 9, 2011

बींट किये हुए चंद आदमकद बुत

स्वयं
को कर विदीर्ण
दिन-प्रतिदिन
रात दर रात
सिद्धांतो के पोषण में
कर दिया देह को भी
समर्पित एक दिन
शाश्वत अग्नि को-
कि रहे अनश्वर
अनादि सनातन सत्य ---
लोग
बड़े विचित्र 
अनुसरण के विपरीत 
महानता का चोला ओढ़ा दिया  
जीते जी पाया सिर्फ
चंद हार,अपवित्र हाथों से
और मरने पर पाया
असहाय मरीज की तरह
अस्पताल के बोर्डों पर नाम
व बींट किये हुए 
धूप में यहाँ वहां चौराहे पर 
बिना छतरी के खड़े 
चंद आदमकद बुत

 कवि परिचयः-
 रामकिशोर उपाध्याय
 मुख्य लेखा अधिकारी,
 वाराणसी,(उ.प्र.)

4 comments:

Swati Vallabha Raj said...

superb......samaaj ki sachhai.....

संध्या सिंह said...

साहित्यकारों की व्यथा कोमार्मिक ढंग से वर्णित करती सुंदर रचना

Always Unlucky said...

I think this is one of the most significant info for me. And i am glad reading your article. But should remark on some general things, The site style is ideal, the articles is really nice : D. Good job, cheers

From Computer Addict

मनीष सिंह निराला said...

बहुत सुन्दर ...!