*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Friday, November 4, 2011

मेरी पहचान

जब मैं छोटी बच्ची थी
मनसा था मेरा नाम ,
बड़ी शरारत करती थी
पर थी मैं घर की शान |
वैसे तो माँ से डरती थी
माँ के आँख दिखाते ही
मैं सहमी-सहमी रहती थी
मेरी चंचल आँखें ही
मन का दर्पण होती थीं
मन की बातें कहती थीं |
एक दिन की बताऊँ बात
जब मैं गई माँ के साथ
सभी अजनबी चेहरे थे
हिल मिल गई सभी के साथ |
माँ ने पकड़ी मेरी चुटिया
कहा यही है प्यारी बिटिया
मौसी ने प्यार जता पूछा
"इतने दिन कहाँ रहीं बिटिया"?
तब यही विचार मन में आया
क्या मेरा नाम नही भाया
जो मनसा से हुई बिटिया
बस मेरी बनी यही पहिचान
'माँ की बिटिया' 'माँ की बिटिया' |
जब मै थोड़ी बड़ी हुई ,
पढ़ने की लगन लगी मुझको
मैंने बोला, "मेरे पापा
मुझको शाला में है जाना "|
शाला में सबकी प्यारी थी
सर की बड़ी दुलारी थी
एक दिन सब पूंछ रहे थे
"कक्षा में कौन प्रथम आया
हॉकी में किसका हुआ चयन "?
शिक्षक ने थामा मेरा हाथ
परिचय करवाया सबके साथ
कहा, "यही है मेरी बेटी
इसने मेरा नाम बढ़ाया !"
तब बनी मेरी वही पहचान
शिक्षक जी की प्यारी शान
बस मेरी पहचान यही थी
मनसा से बनी गुरु की शान |
जिस दिन पहुँची मैं ससुराल
घर में आया फिर भूचाल
सब के दिल की रानी थी
फिर भी नहीं अनजानी थी |
यहाँ मेरी थी क्या पहचान
केवल थी मै घर की जान
अपनी यहाँ पहचान बनाने को
अपना मन समझाने को
किये अनेक उपाय
पर ना तो कोई काम आया
न बनी पहचान |
मै केवल उनकी ही
पत्नी हो कर रह गयी
बस मेरी हुई यही पहचान
श्रीमती हैं घर की शान
अब मैं भूली अपना नाम
माँ की बिटिया ,गुरु की शान
उनकी अपनी प्यारी पत्नी
अब तो बस इतनी ही है
मेरी अपनी यह पहचान |

आशा

3 comments:

Rajesh Kumari said...

poosr jeevan ka chitra maano aankho ke saamne aa gaya.bahut achchi prastuti.

ASHA BISHT said...

achchha likha hai aapne.. naari ke roop badalate rahte hain..

prerna argal said...

poore jeevan ka saar hai aapki kavitaa main.bahut shaandaar rachanaa.bahut badhaai aapko .
मुझे ये बताते हुए बड़ी ख़ुशी हो रही है , की आपकी पोस्ट आज की ब्लोगर्स मीट वीकली (१६)के मंच पर प्रस्तुत की गई है /आप हिंदी की सेवा इसी तरह करते रहें यही कामना है /आपका
ब्लोगर्स मीट वीकली के मंच पर स्वागत है /आइये और अपने विचारों से हमें अवगत करिए / जरुर पधारें /