*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Friday, November 18, 2011

बेबसी की आँधी

बेख़ौफ़ होकर
आँधियां आयेगी
रौंद कर ख्वाबों को
सोते में जगायेगी !



कैसे संभालूँगा 
मैं अपने घरौंदे को ?
तड़पते हुये लहू-लुहान   
अरमां के परिंदे  को...?

कैसे रोक पाऊंगा
वो कहर-जलजला ?
बिखेर देगी तिनकों में
जो प्यारा घोसला 
कुचल देगी पंजों से 
हिम्मत और हौसला
हो जाओगी तू भी दूर
रह जायेगा फासला...!

बेफिक्र आशियां में 
जो प्रेम पल रहे हैं 
सदियों से उम्मीद में
जो चराग जल रहे हैं 
वो अब बुझ जायेगा 
और बुझ कर वहीँ  पर  
स्याह बन जायेंगा !

उस स्याह को लिये मैं
यादों के दर्पण में 
जब भी झाँकूंगा 
अपनी ही नजरों में 
बेदम गिर जाऊंगा ...!

सब बेखबर होंगे 
अपनी  दुनिया में 
और तू भी होगी 
एकदम, बेबस मौन...
फिर हमारे इस- 
टूटे हुये सपनों को
संभालेगा कौन...?

कौन होगा तुम्हारे बाद
जो भरेगा ये घाव ?
कौन समझेगा
मेरे आँसूओं का भाव...?
कहाँ होगा मेरे
जीवन का पड़ाव ?
या फिर यूँ ही खेलेगी
तकदीर हमसे दाव..?

जब जब नजर पड़ेगी
तेरी तस्वीर पर
कई सवाल उभरेगा
अतीत के पटल पर
मैं बुत बन कर
सिसक पड़ूंगा
फिर अपने आप
चुप हो लूँगा...!
पलकों के पोर पे
जब आंसू सूख जायेगा
तब दिले-नादां को 
ये समझाऊंगा
कि
" आंधियां आनी थी आयेगी
आशियाँ  छोड़ना नहीं
 वो जब तक गैर न हो जाये 
ये रिश्ता तोड़ना  नहीं...! "
-: मनीष :-
My Blog : http//:www. mknilu.blogspot.com
E-mail: msnirala1985@gmail.com

5 comments:

Swati Vallabha Raj said...

sundar...bebasi sab kuchh chiin leti hai....

Neeraj Dwivedi said...

आंधियां आनी थी आयेगी
आशियाँ छोड़ना नहीं
वो जब तक गैर न हो जाये
ये रिश्ता तोड़ना नहीं...!

Gair bhi ho jayein to bhi ye rishta todna nahi.. Sundar Rachna.

Life is Just a Life
My Clicks
.

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

सुन्दर रचना....
सादर बधाई...

prerna argal said...

आप की पोस्ट ब्लोगर्स मीट वीकली (१८) के मंच पर शामिल की गई है/.आप आइये और अपने विचारों से हमें अवगत करिए /आप हिंदी की सेवा इसी तरह करते रहें यही कामना है /आपका
ब्लोगर्स मीट वीकली के मंच पर स्वागत है /आइये /आभार /
'

Dr.Nidhi Tandon said...

अच्छी प्रस्तुति !!अगर रूह से रूह का रिश्ता हो तो गैर होने का सवाल ही नहीं पैदा होता...