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Monday, November 21, 2011

सफर जिन्दगी का

वह कल बीत गया
जब हुए सपने रंगीन ,
मैंने कोरे कागज पर
जब नाम लिखा तेरा ,
कागज पर स्याही मिटी नहीं
सूख गई और गहरी हुई ,
लिखी इबारत परवान चढ़ी
फिर दिल में उतरी और पैठ गई
उसे मिटाना सरल नहीं था
मिट जाये कोई कारण नहीं था ,
जीवन अविराम चलता गया
ग्राफ सफलता का बढ़ता गया ,
खुशियों से दामन भरता गया |
जैसे-जैसे उम्र बढ़ी ,
एक दिन बैठे-बैठे
मैं सोच रही थी कैसा था कल |
मैनें देखा झाँक विगत में
बीता कल भोला बचपन ,
गुडिया खेली झूला झूली
और सुनी कहानी परियों की |
मैं सोच-सोच मुस्काने लगी
हरियाला सावन जब आया
लाल चुनरिया तब ओढ़ी,
मन भीगा तन भीग गया
जब सुनी किलकारी नन्हीं की
जीवन में खुशियाँ आने लगीं
मैं दिल खोल खुशी लुटाने लगी |
सब का प्यार दुलार मिला
झिलमिल तारों का हार मिला ,
सुखी संसार साकार मिला
मैं झूम-झूम कर गाने लगी |
कब जीवन की शाम हुई
ढलती उमर सताने लगी
कभी हँसी और कभी खुशी
बीच-बीच में जाने लगी |
अब यही अभिलाषा है बाकी
हर साँस खुशी से भरी रहे
आदत मुस्कराने की गई नहीं
वह सदा मेरे संग रहे |
अंतिम क्षण तक हँसती रहूँ
मेरा जीवन रंगीन रहे ,
खुशियों से नाता सदा रहे |

आशा

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