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Monday, November 7, 2011

बौद्धिक बौनेपन का ख़तरा

जब तक तन में प्राण रहेगा, हार नहीं मानूँगा।
कर्तव्यों के बदले में, अधिकार नहीं मागूँगा।।
http://hbfint.blogspot.com/2011/11/16-eid-mubarak.html


अनवर जमाल जी की रचनाएँ 


2 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत उम्दा!
--
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी की गई है! सूचनार्थ!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...
This comment has been removed by the author.