*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Monday, October 31, 2011

मेरी किस्मत


उन्हें याद आया जब वाफाओ का फशाना मेरा ,
वे तड़प तड़प कर बेतहाशा पछताए|                    
वो अपने गुनाहों की माफी मागने घर मेरे आये|
मेरे घर वालो ने मेरा नया पता दिया उनको |            
वो दौड़ते दौड़ते हमसे मिलने वहा भी  वो आये|
दहलीज पर मेरे खूब आवाज लगाईं उन्होंने,
आशुओं से भिगोया भी जी भर कर मुझको|
पर हम तो ऐसा सोये अपनी कब्र पर
की जाग भी न पाए उनकी इस दस्तक पर.

रचनाकार --प्रदीप तिवारी
www.kavipradeeptiwari.blogspot.com

1 comment:

मनीष कुमार ‘नीलू’ said...

बहुत मार्मिक लिखा है आपने! दिल को छू गया!
सर इतने दिनों बाद आपकी रचना पढ़ रहा हू आप कहाँ खो गये थे ?
मेरी नई पोस्ट के लिए स्वागत है मेरे ब्लॉग जीवन पुष्प पर www.mknilu.blogspot.com