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Tuesday, October 25, 2011

आत्मदीप

लो फिर से आ गए दिवाली
मेरे मन के आत्मद्वीप पर
उस प्रदीप पर
काम क्रोध के
पर्तिशोध के
वे बेढंगे
कए पतेंगे
शठ रिपु जैसे थे मंडराए
मुझ पर छाए
पर मैंने तो
उनको सबको
बाल दिया रे
अपने मन से
इस जीवन से
मैंने उन्हें
निकाल दिया रे
मगन में जला
लगन से जला
और मैंने
शांति की दुनिया बसा ली
लो फिर से आ गए दिवाली

5 comments:

आशा said...

दीपावली के शुभ अवसर पर हार्दिक शुभ कामनाएं |
आशा

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

चर्चा मंच परिवार की ओर से दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ!
आइए आप भी हमारे साथ आज के चर्चा मंच पर दीपावली मनाइए!

महेन्द्र मिश्र said...

दीपावली पर्व अवसर पर आपको और आपके परिवारजनों को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई .....

मनीष कुमार ‘नीलू’ said...

बहुत सूंदर... दीपावाली की शुभकामनायें।
आयें मेरे ब्लाग पर भी..

अनुपमा पाठक said...

सुन्दर!
शुभ दीपावली!