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Tuesday, October 11, 2011

हमारी मां की दुआ-सी दुआ किसी की नहीं



हैं सब नसीब की बातें खता किसी की नहीं
ये जि़दगी है बड़ी बेवफा किसी की नहीं।

तमाम जख्म जो अंदर तो चीखते हैं मगर
हमारे जिस्म से बाहर सदा किसी की नहीं।


वो होंठ सी के मेरे पूछता है चुप क्यों हो
किताबे-ज़ुर्म में ऐसी सज़ा किसी की नहीं।

बड़े-बड़े को उड़ा ले गई है तख्त केसाथ
चरा$ग सबके बुझेंगे हवा किसी की नहीं।

'नज़ीर सबकी दुआएं मिली बहुत लेकिन
हमारी मां की दुआ-सी दुआ किसी की नहीं।

Source : http://blogkikhabren.blogspot.com/2011/10/blog-post_08.html

2 comments:

SHASHI PANDEY said...

waah bahot khoob ...
sach me maa se badh kar is sare jahan me kisi ki dua nahi hoti..au kya kahun aap ki is abhivyakti ke liye alfaaz hi nahi hain mere paas...

pradeep tiwari said...

bahut hi sundar wah ..........