*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Tuesday, October 11, 2011

मेरी वफ़ा

  सारे ज़माने ने कहा मुझसे ,
इस बेवफा के जाल में  मत फसना| 
             फिर भी हम उनके ,
           जाल मे फसते चले गए|
लूटने का इरादा था उनका पक्का,
 पर वो खुद हमसे लुटते चले गए|
                उनकी हर बेवफाई को,
           हम वफ़ा का सहारा देते चले गए|
जो बेवफा थे इस सारे जहा में,
वो हमारे इश्क मे वफादार बन गए| 
रचनाकार --प्रदीप तिवारी
 www.kavipradeeptiwari.blogspot.com

pradeeptiwari.mca@gmail.com

No comments: