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Saturday, October 29, 2011

त्यौहार समभाव

राखी, ईद, दिवाली, होली,
बैसाखी और ओनम ,
साथ मना कर रंग जमायें,
खुशियों से आखें हों नम |
आओ हिलमिल साथ मनायें
पोंगल और बड़ा दिन ,
हर त्यौहार हमारा अपना ,
हम अधूरे इन बिन |
सूना-सूना जीवन होगा
और ज़िन्दगी बेरंग ,
झूठा मुखौटा धर्म का
न होगा अनावृत इन बिन |
अनेकता में एकता का
रहा यही इतिहास ,
राष्ट्रीय पर्व यदि ना होते
ना होता विश्वास |
आस्थाएँ टूट जातीं
होता हमारा ह्रास ,
इसीलिए सब साथ मनायें
ये सारे त्यौहार |
सारे पर्व भरे जीवन में
एक नया उत्साह ,
अनेकता में एकता का
बना रहे इतिहास |
नया नहीं कुछ करना है
जीवन मे रंग भरना है ,
नित नये त्यौहार मनायें
खुश हो सब संसार|
सब में समभाव ज़रूरी है
नहीं कोई उन्माद ज़रूरी
है यही आज की माँग
आओ हम सब साथ मनायें
ये सारे त्यौहार |

4 comments:

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

सुन्दर रचना

आशा said...

धन्यवाद संगीता जी |दीपावली के शुभ अवसर पर हादिक शुभ कामनाएं |
आशा

Kunwar Kusumesh said...

nice message.

आशा said...

thanks for coming on this blog .
Asha