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Monday, October 17, 2011

दोहरापन....

 
 
दोहरापन....


मन की बातों को
समझना और जानना 
दोनों ही बड़ा कठिन है..!!
ऊपर-ऊपर  के हमारे शब्द
जब हमारे भावों से
मेल न खाएं,
शब्द कुछ कहें
और चेहरे के भाव
कुछ और ही बताएं
तो........
कहीं कुछ चुभता है
एक छलावे का एहसास सा
करा जाता है मन को.....!
जो लोग जीते हैं
दोहरी जिन्दगी को...
दोहरे एहसास को...
हर पल, हर वक़्त
उनके लिए तो
आसान है ये सब ,
लेकिन जिनके लिए
मन के एहसास ही   
जिंदगी भी हों ,
उनके लिए मुश्किल है
ऐसी दोहरी नीति,दोगलापन !
और फिर.... 
सारी बातें,सारे स्पर्श
झूठे लगते है तब !!
जब हम कुछ कहें
और  हमारे चेहरे के भाव,
आँखें और खोया-खोया सा
ये मन कुछ  और कहे ...
तब.....!!
 

2 comments:

sushma 'आहुति' said...

प्रभावशाली रचना....

Roshi said...

bilkul sach hai ...........
sunder bhav