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Saturday, October 8, 2011

मै और तुम =मै

गमो का तूफ़ान सीने मे थाम रखा है|
आसुओं से तेरा चमन उजड़ा तो उजाडा कैसे जाये

          मुस्कराहट को ओठो मे बसा लिया हमने |
         कही तू बेवफा बदनाम ना हो जाये|

भूलने की कोशिस हजार की मैंने 
पर दिल मे बसे हुए को भूला तो भूला कैसे जाये
            
             मोहब्बत को हमने खुदा मान  लिया |
             अब बिना इबादत रहा तो रहा  कैसे जाये|

बेवफाई की आदत होगी तुम्हे
वफ़ा तो मेरे रगों मे है|
 तू ही बता
तुझसे इंतकाम लिया तो लिया  कैसे जाये
               तेरे झूठी वाफाओ के किस्से हमने फैला रखे है |
                 तू ही बता
                अपने प्यार को बदनाम किया तो किया कैसे जाये|
 रचनाकार -प्रदीप तिवारी
www.kavipradeeptiwari.blogspot.com
pradeeptiwari.mca@gmail.com
         

8 comments:

anita agarwal said...

तेरे झूठी वाफाओ के किस्से हमने फैला रखे है |
बता तू ही
अपने प्यार को बदनाम किया तो किया कैसे जाये|


wah bahut khoob ...

Patali-The-Village said...

बहुत सुन्दर रचना| धन्यवाद|

वन्दना said...

बहुत सुन्दर रचना।

somali said...

तेरे झूठी वाफाओ के किस्से हमने फैला रखे है |
बता तू ही
अपने प्यार को बदनाम किया तो किया कैसे जाये|

bahut sundar rachna.......

सागर said...

sundar prstuti...

मनीष कुमार ‘नीलू’ said...

मुस्कराहट को ओठो मे बसा लिया|
कही तू बेवफा बदनाम ना हो जाये ye line dil ko chhoo gaya.. bahut sunadr..

श्रीप्रकाश डिमरी /Sriprakash Dimri said...

मोहब्बत को हमने खुदा मान लिया |

अब बिना इबादत रहा तो रहा कैसे जाये|
बहुत सुन्दर रचना ...सादर धन्यवाद...

कविता रावत said...

बढ़िया ख्याल ...बढ़िया रचना