*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Saturday, October 1, 2011

मत कहो सच



मत कहो कुछकोई बच्चा कुनमुना है,
सूर्य लेकर हाथ में, सच ढूंढने की कोशिश,
भी हार सकती है,
बाहर सब ओर कोहरा घना है॥

मत जगाओ देश कोयह अनसुना है,
किसान का हलसैनिक की बन्दूक,
भी हार सकती है,
धन का नशा कई गुना है॥

मत कहो सचआजकल बिलकुल मना है,
पत्रकारिता की बिकी कलम को छोड़ोये कलम,
ना हार सकती है
सत्य का न ही नामों निशां है॥

मत समझनागरीब भी मानव जना है,
इन्हें बचाने की कोशिश करती, इंसानियत
भी हार सकती है
ये न मिट्टी का बना है॥

मत कहो कुछकोई बच्चा कुनमुना है

4 comments:

pradeep tiwari said...

sachhai ka har tathya kable tarif hai

Pallavi said...

सार्थक पोस्ट ...मत कहो सच....

Neeraj Dwivedi said...

Bahut abhar Pradeep Ji aur Pallvi Ji.

कोई चाहने वाला होता
टूट गया सूरज दीपों में
.

anita agarwal said...

bahut achhi rachna...aaj ke sach ko ujagar kerti....