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Saturday, September 3, 2011

फिर बेवफाई....

धूप की तपिस मे,
ठंडी छाओ थी|
गम के मौसम मे,
ख़ुशी की बहार थी|
मेरे अकेलेपन मे,
पूरी महफ़िल थी|
मेरे मृत जीवन मे
अमृत सुधा थी |
                             उसको पाके जीवन लगा था मै जीने|
                              पर क्यों फिर मार  दिया मुझे उसने|
                             क्यों  मारा उसने यूं  तड़पा कर हमें|
                              हम तो यूं ही जान दे देते उन्हें|
                                   

रचनाकार--प्रदीप तिवारी
                                      
www.kavipradeeptiwari.blogspot.com
                                       
www.pradeeptiwari.mca@gmail.com


1 comment:

NEELKAMAL VAISHNAW said...

बहुत ही सुन्दर पढ़ कर अच्छा लगा......

आप भी आये यहाँ कभी कभी
MITRA-MADHUR
MADHUR VAANI
BINDAAS_BAATEN