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Thursday, September 29, 2011

दिल


   

पत्थरों को मनाने मे
फूलो का कत्ल क्या करना|
      खुद के खातिर किसी बेक़सूर को
      उसके गुलशन से जुदा क्या करना
खुद की ख़ुशी के लिए
किसी को दुखी क्या करना
       पत्थरो के पिघलाने  से अछ्छा है मेरे दोस्त
        फूलो के  प्यार को अपना समझना 
       रचनाकार -प्रदीप तिवारी
      www.kavipradeeptiwari.blogspot.com

8 comments:

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

कल 30/09/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

श्रीप्रकाश डिमरी /Sriprakash Dimri said...

गहन अनुभूति और आह्वान ..शुभ कामनाएं !!!

Manish Kumar 'Nilu' said...

bahut sundar bhaav hai sir

u can view my blog
www.manishkrnilu.blogspot.com

आशा said...

भावपूर्ण रचना के लिए बधाई |
आशा

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

सार्थक सन्देश देती अच्छी रचना

Amrita Tanmay said...

सुन्दर भाव

Neelam said...

पत्थरों को मनाने मे
फूलो का कत्ल क्या करना|
pehli hi 2 lines padhi aur dil main utar gayin. behadd umda bhaav . bahut khoob.

http://neelamkahsaas.blogspot.com/2011/09/blog-post.html

रेखा said...

सुन्दर सन्देश देती हुई रचना ..