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Thursday, September 15, 2011

एक इंजिनियर की आत्मकथा


इंजिनीयर्स डे पर "मोक्षगुंडम विश्वेस्वरैया", जिनके जन्म तिथि पर ये मनाया जाता है, को सादर नमन |
पेश है मेरी एक रचना |

मैं एक इंजिनियर हूँ,
जिंदगी के हर एक क्षेत्र में, कभी जूनियर तो कभी सीनियर हूँ,
मैं एक इंजिनियर हूँ।

बचपन से लेके आज तक,
पढ़ाई से कभी रिश्ता न गया,
किताबों और कंप्यूटर में घुसा, कहने को मैं superior हूँ,
मैं एक इंजिनियर हूँ।

चार साल वो कॉलेज के,
मस्ती में ही उड़ते गए,
कंपनी दर कंपनी रगड़ता हुआ, मैं अजीब creature हूँ,
मैं एक इंजिनियर हूँ।

माँ-बाप के हरेक सपने,
पुरा किया पर साथ न रहा,
सब कुछ पाकर भी खोया हुआ, बहता हुआ मैं river हूँ,
मैं एक इंजिनियर हूँ।

प्यार दोस्ती भी खूब किया,
शादी-बच्चे भी संभाला है,
जिम्मेदारी से भागा नही, मैं ख़ुद अपना career हूँ,
मैं एक इंजिनियर हूँ।

पैसों की तो कमी न हुई,
पर परिवार संग रह न पाया,
भाग-दौड़ में भागता हुआ, चलता हुआ मैं timer हूँ,
मैं एक इंजिनियर हूँ।

हर एक रूप जिंदगी का,
देखा है मैंने करीब से,
हर कष्टों को झेला मैंने, हर प्रॉब्लम से मैं familiar हूँ,
मैं एक इंजिनियर हूँ।

बुढ़ा हुआ तब पीछे देखा,
हाथ में कुछ न साथ में कुछ,
भटक-भटक के रुक सा गया, पड़ा हुआ एक furniture हूँ,
मैं एक इंजिनियर हूँ |

मौत की घड़ी जब पास है आई,
पाने को कुछ न खोने को कुछ,
सबकी ही तरह रवाना होता, आसमान के मैं near हूँ,
मैं एक इंजिनियर हूँ |

(ये एक आम इंजिनियर के मन की उस समय की सोच है जब वो पुरी जिंदगी बिताने के बाद मरने के कगार पर होता है। वो एक मध्यम वर्गीय परिवार से होके भी एक इंजिनियर तो बन जाता है पर जिंदगी भर वो 'आम' ही रह जाता है। )


5 comments:

Ram Swaroop Verma said...

इंजीनियर दिवस की शुभकामनाए, कविता मजेदार है

ईं.प्रदीप कुमार साहनी said...

धन्यवाद राम स्वरूप जी | मेरे ब्लॉग में भी पधारें |

prerna argal said...

इंजिनियरस दिवस पर आपको बहुत बहुत शुभकामनाएं /बहुत ही सुंदर प्रस्तुति /इंजिनियर के पूरे जीवन का लेखा-जोखा आपने अपनी रचना में उजागर किया /बहुत बधाई आपको /
मेरे ब्लॉग पर आने के लिए शुक्रिया /आशा है आगे भी आपका आशीर्वाद मेरी रचनाओं को मिलता रहेगा /

pradeep tiwari said...

ek engineer ki vastvik kahani hai

Ghotoo said...

sundar rachna-maine bhi engineering ke bad kafi paapad bele hai,haan,un
dino computer nahi ,slide rule hote the-ye 1963 ki baat hai jab maine
B.H.U.se engeeneerig kiya tha-aapki rachna pad jeewan ka sandhash yaad aa gaya-dhanywad
ghotoo