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Thursday, September 29, 2011

तलाश


 
 शुखो की देहलीज पर
 शुखो को तलाशता हू 
                     अपनों के बीच पर 
                      खुद को तलाशता हू
जिन्दगी की दौड़ पर
जिन्दगी को तलाशता हू
           इस  भीड़ भरी  दुनिया पर
          खुद को तलाशता हू
इस तलास की तलाश पर
इधर उधर भागता हू
             ठहरने की फुरशत नहीं पर
             ठहरने  का ठौर तलाशता हू
जिन्दगी को जिन्दगी नहीं दी पर
मौत के लिए कफ़न तलाशता हू
            कहने के लिए तो सारा जहा है मेरा पर
           इस दुनिया मे अपना घर तलाशता हू 
            

रचनाकार--प्रदीप तिवारी
www.pradeeptiwari.blogspot.com
             

5 comments:

श्रीप्रकाश डिमरी /Sriprakash Dimri said...

कहने को तो जहां सारा है
तलाशता हूँ अपना घर ...बहुत ही हृदय स्पर्शी अभिव्यक्ति ..
सादर !!!

prerna argal said...

कहने के लिए तो सारा जहा है मेरा पर
इस दुनिया मे अपना घर तलाशता हू
वह बहुत ही उम्दा तरीके से मन के भावों को रचना के माध्यम से ब्यक्त किया है /बहुत अनुपम रचना बहुत बधाई आपको / आप और आपके परिवार को नवरात्रि की बहुत बहुत शुभकामनायें /देवी माँ आपकी सारी मनोकामना पूर्ण करे /मेरी नई पोस्ट पर आपका स्वागत है/जरुर पधारें /


www.prernaargal.blogspot.com

Manish Kumar 'Nilu' said...

bahut sundar bhav hai sir..

ZEAL said...

bahut sundar likha hai.

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

कल 01/10/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!