*साहित्य प्रेमियों का एक संयुक्त संघ...साहित्य पुष्पों की खुशबू फैलाता हुआ*...."आप अपनी रचना मेल करे अपनी एक तस्वीर और संक्षिप्त परिचय के साथ या इस संघ से जुड़ कर खुद रचना प्रकाशित करने के लिए हमे मेल से सूचित करे" at contact@sahityapremisangh.com पर.....हम आपको सदस्यता लिंक भेज देंगे.....*शुद्ध साहित्य का सदा स्वागत है*.....

Followers

Wednesday, September 21, 2011

बीबी को खुश रख्खो

बीबी को खुश रख्खो
-------------------------
जीवन में सुखी रहना है,
तो बीबी को खुश रख्खो
और जीवन का अमृत चख्खो
अगर वो थोड़ी काली है,
तो भी उसके रूप की तारीफ़ करते रहो
उसे चाँद का टुकड़ा कहो
पत्नी के प्यार पाने का ये सबसे अच्छा तरीका है
उसे क्या पता कि तुम उसे चाँद के ,
उस भाग का टुकड़ा कह रहे हो,
जहां काला धब्बा है
अगर वो खाना बनाती है
और रोटियां जल जाती है
तुम उससे बोलो कि देखो,
तुम्हारा रूप देख कर के,
रोटियां भी जल भुन जाती है
और यदि वो बहुत ज्यादा बक बक करती हो
तो कहो कि तुम्हारे प्यारे प्यारे होंठ,
जब पास पास रहते है तो,
तुम कितनी प्यारी लगती हो
भले छरहरी काय वाली महिलाओं को देख,
आपका मन फिसलता है
और आपकी पत्नी थोड़ी मोटी है
तो कहो भरा भरा मांसल बदन ,
कितना प्यारा लगता है
तुम कितनी सुढोल हो,कितनी सुहाती हो
भले ही सुढोल से आपका मतलब ,
'सु'याने कि अच्छा 'ढोल'
और सुहाती से,
'सु' याने कि अच्छा 'हाथी' हो
अपने मन कि भावनाएं भी खोलो
पर कुछ एसा मीठा  मीठा बोलो
कि विवाहित जीवन में अमृत घोलो

मदन मोहन बाहेती'घोटू'

6 comments:

Maheshwari kaneri said...

बहुत रोचक.. लेकिन पत्नी को कभी कम न समझना.........

आशा said...

बहुत अच्छे तरीके सुझाए हैं बीबी को खुश रखने के |
आशा

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
राम-राम!

Kajal Kumar said...

किसकी ?

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " said...

बढ़िया हास्य ...

Dilbag Virk said...

आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है.
कृपया पधारें
चर्चामंच-645,चर्चाकार- दिलबाग विर्क