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Wednesday, September 14, 2011

हिन्दी पखवारा

भाषा जो सम्पर्क की हिन्दी उसमे मूल।
बनी न भाषा राष्ट्र की यह दिल्ली की भूल।।
राज काज के काम हित हिन्दी है स्वीकार।
लेकिन विद्यालय सभी हिन्दी के बीमार।।

भाषा तो सब है भली सीख बढ़ायें ज्ञान।
हिन्दी बहुमत के लिए नहीं करें अपमान।।

मंत्री की सन्तान सब अक्सर पढ़े विदेश। 
भारत में भाषण करे हिन्दी में संदेश।।

दिखती अंतरजाल पर हिन्दी नित्य प्रभाव।
लेकिन हिन्दुस्तान में है सम्मान अभाव।।

सिसक रही हिन्दी यहाँ हम सब जिम्मेवार।
करो राष्ट्र-भाषा इसे ऐ दिल्ली सरकार।।

पन्द्रह दिन क्यों वर्ष में हिन्दी आती याद? 
हो प्रति पल उपयोग यह सुमन करे फ़रियाद।। 



कवि परिचयः-
श्यामल सुमन
सहरसा,बिहार
shyamalsuman@gmail.com

7 comments:

ईं.प्रदीप कुमार साहनी said...

हिंदी के सम्मान में बहुत सुन्दर रचना |

Dr (Miss) Sharad Singh said...

हिन्दी की दशा पर कटाक्ष करती शानदार रचना...

Pallavi said...

बेहद सटीक और सुंदर रचना सर मज़ा आज्ञा पढ़ कर

भाषा तो सब है भली सीख बढ़ायें ज्ञान।
हिन्दी बहुमत के लिए नहीं करें अपमान।।

मंत्री की सन्तान सब अक्सर पढ़े विदेश।
भारत में भाषण करे हिन्दी में संदेश।।
बहुत खूब.....

Udan Tashtari said...

हिंदी दिवस पर बहुत बहुत हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाएं

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत सार्थक प्रस्तुति

श्यामल सुमन said...

आदरणीय साहनी जी, डा० शरद, पल्लवी जी, समीर भाई, संगीता जी और सत्यम जी - आप सबके प्रति विनम्र आभार प्रेषित है - यूँ ही स्नेह बनाए रखें
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
http://www.manoramsuman. blogspot.com
http://meraayeena.blogspot. com/
http://maithilbhooshan. blogspot.com/

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सार्थक!
--
हिन्दी भाषा का दिवस, बना दिखावा आज।
अंग्रेजी रँग में रँगा, पूरा देश-समाज।१।

हिन्दी-डे कहने लगे, अंग्रेजी के भक्त।
निज भाषा से हो रहे, अपने लोग विरक्त।२।

बिन श्रद्धा के आज हम, मना रहे हैं श्राद्ध।
घर-घर बढ़ती जा रही, अंग्रेजी निर्बाध।३।