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Thursday, September 15, 2011

इंजीनियर

इंजीनियर

निर्माण के आगे निर्माण की सोचो,
जहाँ से हो राह असंभव,
उस जगह से ही रास्ता खोजो !
जहाँ हो ठहरना नामुमकिन, 
वहां अपना घर बसा लो !
इंजीनियर्स के लिए कुछ भी असंभव नहीं,
बस असंभव में संभावनाओ को खोजिये !
इंजीनियर पहचान का मोहताज  नहीं होता,
पहचान तो अपने आप बन जाती है,
बस अपने आविष्कारों में अपनी पहचान खोजिये! 

इंजीनियर दिवस की शुभकामनाये ( १५ सितम्बर )

रचनाकार - प्रदीप तिवारी 
www.kavipradeeptiwari.blogspot.com
E-mail : pradeeptiwari.mca@gmail.com

4 comments:

संजय भास्कर said...

कविता अच्छी लगी ।
इंजीनियर दिवस की शुभकामनाये

Maheshwari kaneri said...

इंजीनियर दिवस की शुभकामनाये.....कविता अच्छी है...।

Ram Swaroop Verma said...

इंजीनियर दिवस की शुभकामनाए, कविता मजेदार है।

ईं.प्रदीप कुमार साहनी said...

badhiya rachna ..
इंजीनियर दिवस की शुभकामनाये