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Tuesday, September 20, 2011

हथेली पर जान लेके चलने वाले

हथेली पर जान लेके चलने वाले
          हथेली पर जान लेके चलने वाले
          तूफ़ां से भला कहाँ डरते हैं
          हिम्मत का पतवार थामे
          वे अपनी राह खुद बनाते हैं
   बिजली बन कर बाधाओ पर
बेखौफ हो ,,टूट पड़ते हैं
    मन में विश्वास भर कर वे
 अग्निपथ पर बढ़ते  हैं
            न कोसते किस्मत को वे
            बिगडी़ खुद ही बना लेते हैं
            दर्द की हर लकीरों को वे
हाथों से खुद मिटा देते है    
धैर्य की भट्टी में तप  कर
लोहे को मोम बना देते है
  तलवार की धार पर चल कर
नया इतिहास रचा लेते हैं
         हथेली पर जान लेके चलने वाले
          तूफ़ां से भला कहाँ डरते हैं
      **********************************************************

3 comments:

वन्दना said...

वाह बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

Dr (Miss) Sharad Singh said...

आत्मसम्मान की भावना जगाती सुन्दर रचना...

pradeep tiwari said...

bhut hi sundar