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Friday, September 9, 2011

................अफसर

बन गया है, वो
जिले का, एक बड़ा
सबसे बड़ा अफसर
बंगला है, गाडी है
वेतन - भत्ते
नौकर - चाकर हैं
और न जाने
क्या क्या नहीं होगा
पर, उसकी
एक पुरानी आदत
नहीं गई, मांगने की
जब भी
मांगना होता है, उसे
मुंह खोलकर, मांग लेता है !!


लेखक परिचय :-
श्याम कोरी ' उदय '

6 comments:

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

अच्छी प्रस्तुति यथार्थ को कहती हुई

prerna argal said...

bahut saarthak aur shaandaar abhibyakti.badhaai aapko.





please visit my blog
www.prernaargal.blogspot.com

Maheshwari kaneri said...

यथार्थ को दर्शाती सार्थक और सटीक अभिव्यक्ति..

Rajesh Kumari said...

achcha kataaksh kiya hai.sateek rachna.

ईं.प्रदीप कुमार साहनी said...

बहुत यथार्थवादी रचना |

LAXMI NARAYAN LAHARE said...

अच्छी, भावभरी कविता हार्दिक बधाई ..
कोसीर ...ग्रामीण मित्र ! में आपका स्वागत है

.................................

कोसीर... ग्रामीण मित्र !