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Monday, September 5, 2011

शैतान शिष्या और टीचर

शैतान शिष्या और टीचर
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            १
परेशान टीचर हुई,शिष्या थी शैतान
बोली तुमको ठीक मै,करू  पकड़ कर कान
करू पकड़ कर कान,दूर शैतानी सारी
हफ्ते भर जो बन जाऊं मम्मी तुम्हारी
शिष्या बोली ,सच टीचर,मै तो हूँ रेडी
पर क्या ये प्रस्ताव मान जायेंगे डेडी
                २
डेडी जी  ने जब सुना,बेटी का प्रस्ताव
मुदित हुआ मन, बढ़ गया,बाँछों  का फेलाव
बाँछों का फेलाव,कहा इच्छा हो जैसी
पर तुम्हारी टीचर है दिखने में कैसी
मम्मी बोली उसको आने तो घर में
वो क्या,उसको ठीक करू मै हफ्ते भर में

मदन मोहन बाहेती 'घोटू'

2 comments:

Maheshwari kaneri said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...बधाई..

रविकर said...

पहली कक्षा की शिक्षिका--
माँ के श्रम सा श्रम वो करती |
अवगुण मेट गुणों को भरती |
टीचर का एहसान बहुत है --
उनसे यह जिंदगी संवरती ||


माँ का बच्चा हरदम अच्छा,
झूठा बच्चा फिर भी सच्चा |
ठोक-पीट कर या समझाकर-
बना दे टीचर सच्चा-बच्चा ||


लगा बाँधने अपना कच्छा
कक्षा दो में पहुंचा बच्चा |
शैतानी में पारन्गत हो
टीचर को दे जाता गच्चा ||